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वायरलैस नेटवर्क की लोकप्रियता से खतरे में सुरक्षा

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केपीएमजी नामक कंपनी ने अपनी साइबर सेटी रिपोर्ट में बताया है कि मुंबई में साठ फीसदी से ज्यादा वायरलैस कनेक्शन असुरक्षित हैं। यह स्थिति मुंबई जैसे महानगर की है जहां शिक्षित और तकनीकी रूप से जागरूक आबादी का अनुपात बाकी देश की तुलना में बहुत अच्छा है। बाकी देश में वायरलैस सुरक्षा की स्थिति का अनुमान लगाना मुश्किल नहीं है। भारत ही क्या, इंग्लैंड जैसे विकसित देश में भी इस बारे में जागरूकता का स्तर हमसे बहुत बेहतर नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार वहां के घरों में इन्स्टाल आधे वायरलैस ब्रॉडबैंड कनेक्शन असुरक्षित हैं। जर्मनी की सरकार ने तो ऐसे असुरक्षित वायरलैस कनेक्शन रखने वाले उपयोक्ताओं पर जुर्माना लगाना शुरू कर दिया है। ऐसे नेटवर्कों में हैकिंग की आशंकाएं वाकई गंभीर हैं और उनके दुष्परिणाम दूरगामी।

सन 2008 के अहमदाबाद बम विस्फोटों की जांच के सिलसिले में कुछ महीने पहले जब जांच एजेंसियां एक निर्दोष अमेरिकी नागरिक कीथ हेवुड तक जा पहुंचीं, तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि उन्हें कितना बड़ा आघात लगा होगा! एजेंसियों ने उन्हें बताया कि विस्फोटों के ठीक पहले आतंकवादियों ने उनके के वाई-फाई (वायरलैस इंटरनेट) नेटवर्क से ईमेल संदेश भेजे थे।

सुविधाजनक और झंझटों से मुक्त होने के कारण दफ्तरों, शिक्षण संस्थाओं और घरों में भी ब्रॉडबैंड इंटरनेट के लिए वायरलैस नेटवर्क (वाई-फाई) इन्स्टाल करने का चलन बढ़ता जा रहा है। वायरलैस भविष्य की तकनीक है और आपके संसार में न्यूनतम दखल करती है। एक कोने में जरा सी जगह दे दीजिए तो आप वायरलैस नेटवर्क से कनेक्ट, ब्रॉडबांड इंटरनेट से कनेक्ट और नतीजे में पूरी दुनिया से कनेक्ट! अलबत्ता, इस आसान और सुविधाजनक तकनीक के बारे में सब कुछ अच्छा-अच्छा ही नहीं है। आपके ब्रॉडबैंड तथा नेटवर्क कनेक्शन की सुरक्षा को लेकर कुछ गंभीर चिंताएं भी उठाई जाती रही हैं। अगर आपका वायरलैस नेटवर्क ‘हैक‘ हो जाता है तो न आपके गोपनीय डेटा सुरक्षित हैं और न ही आपका ब्रॉडबैंड कनेक्शन, जिसका दुरुपयोग कोई अनजान व्यक्ति भी कर सकता है। आपकी सुरक्षा की कीमत पर।

सुविधा बड़ी या सुरक्षा

कंप्यूटर नेटवर्किंग के बारे में आम लोगों की जानकारी कम है। क्या आप जानते हैं कि दो कंप्यूटरों को एक दूसरे से जोड़ने के लिए सामान्य ईथरनेट क्रॉसओवर केबल ही पर्याप्त है? ऐसा केबल जो एक कंप्यूटर के नेटवर्क कार्ड को दूसरे कंप्यूटर के नेटवर्क कार्ड से जोड़ सके। लेकिन आपके दफ्तर या घर के नेटवर्क को बेहतर ढंग से स्थापित करने और उसमें दो से ज्यादा कंप्यूटरों को जोड़ने के लिए कुछ नेटवर्किंग डिवाइसेज की जरूरत पड़ती है, जैसे हब, स्विचेज और राउटर। अपने कंप्यूटर या नेटवर्क को इंटरनेट से कनेक्ट करने के लिए ब्रॉडबैंड राउटर्स या मॉडम का इस्तेमाल किया जाता है। नेटवर्किंग से जुड़ी ज्यादातर डिवाइसेज वायर्ड और वायरलैस दोनों श्रेणियों में उपलब्ध हैं। इन्स्टालेशन में आसानी, तारों के झंझट से मुक्ति और मैनेज करने की सुविधा को देखते हुए अब बहुत से लोग वायरलैस युक्त डिवाइसेज को चुनने लगे हैं।

एक जमाना था जब दफ्तरों की प्लानिंग के समय दीवारों में नेटवर्क की केबलें डालने के लिए पहले ही व्यवस्था कर दी जाती थी ताकि नेटवर्क वायर बाहर फैले हुए दिखाई न दें। वायरलैस के आने के बाद ऐसा करना अनावश्यक हो गया है। वायर्ड नेटवर्क में आपके हर कंप्यूटर को एक नेटवर्क वायर के जरिए हब, स्विच, राउटर और मॉडम जैसे यंत्रों से जोड़ना पड़ता है। ऐसा करने में वक्त भी लगता है और असुविधा भी बहुत होती है। जो लोग लैपटॉप कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए वायर्ड नेटवर्क में दुविधा और बढ़ जाती है क्योंकि तार से जुड़ा लैपटाप इधर-उधर ले जाना मोबिलिटी की उस बुनियादी अवधारणा के ही खिलाफ है, जिसके लिए लैपटॉप जाने जाते हैं। ऐसे में वायरलैस नेटवर्क स्वाभाविक पसंद बन जाता है। एक बार वायरलैस राउटर और मॉडम इन्स्टाल और कन्फीगर करने के बाद पूरे दफ्तर या घर में किसी भी स्थान पर डेस्कटॉप, लैपटॉप और अन्य कंप्यूटिंग डिवाइसेज पर नेटवर्किंग और ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सेवाएं इस्तेमाल करना संभव है।

जहां तक कीमत का सवाल है, वायरलैस नेटवर्क अपने तमाम फायदों के बावजूद वायर्ड नेटवर्क से सस्ता पड़ सकता है, खासकर उस स्थिति में, जब आपको इमारत के ढांचे में तारों को बिछाने के लिए गुंजाइश बनानी पड़े। अगर तार पहले ही बिछे हुए हैं तो यह सस्ता पड़ेगा क्योंकि लगभग सभी डेस्कटॉप और लैपटॉप कंप्यूटरों में लैन कार्ड पहले से मौजूद होता है और उसे अलग से खरीदने की जरूरत नहीं है। दूसरी तरफ, वायरलैस नेटवर्किंग के लिए जरूरी नेटवर्क कार्ड डेस्कटॉप कंप्यूटरों के लिए अलग से खरीदने पड़ सकते हैं। हालांकि अमूमन सभी लैपटॉप कंप्यूटरों में यह पहले से ही मौजूद होता है। अगर लंबे समय के फायदों पर गौर किया जाए तो वायरलैस नेटवर्क सस्ता ही सिद्ध होगा।

परफारमेंस और सिक्यूरिटी

लेकिन परफारमेंस के मामले में वायर्ड नेटवर्क वायरलैस की तुलना में कहीं बेहतर हैं। अगर आप सौ एमबीपीएस डेटा ट्रांसफर क्षमता वाली फास्ट ईथरनेट तकनीक इस्तेमाल करते हैं तो नेटवर्क पर हर किस्म की गतिविधियां (जैसे इंटरनेट का इस्तेमाल, फाइल ट्रांसफर, प्रिंट आउट लेना, गेम खेलना आदि) बड़े आराम से पूरी हो जाती हैं। अगर आप दस एमबीपीएस का सामान्य ईथरनेट कनेक्शन इस्तेमाल कर रहे हैं तो जरूर ज्यादा गतिविधियों की स्थिति में यदा-कदा कुछ रुकावट महसूस हो सकती है। पारंपरिक नेटवर्किंग कई दशकों से चल रही है और उसकी तकनीक का लगातार विकास होता चला गया है। इसीलिए वह ज्यादा तेज और भरोसेमंद मानी जाती है। एक बार स्थापित होने के बाद वायर्ड नेटवर्कों में अगर कोई दिक्कत आती है तो आम तौर पर सिर्फ ढीले तारों की वजह से। वरना एक बार इन्स्टाल करने के बाद आप कई साल तक अपने वायर्ड नेटवर्क पर निर्भर रह सकते हैं।

यही बात सुरक्षा के मामले में भी कही जा सकती है। वायर्ड नेटवर्क स्वाभाविक रूप से ज्यादा सुरक्षित हैं क्योंकि वे सिर्फ उन्हीं कंप्यूटरों पर उपलब्ध हैं जिन्हें नेटवर्क से बाकायदा नेटवर्किंग वायर के जरिए जोड़ा गया है। दूसरी तरफ वायरलैस नेटवर्क के सिग्नल आपके आसपास के माहौल में व्याप्त हैं जिनके अनधिकृत लोगों द्वारा ‘हैक‘ कर लिए जाने की आशंका बनी रहती है। हालांकि जरूरी सावधानियां बरतकर आप अपने वायरलैस नेटवर्क को ज्यादा सुरक्षित, और लगभग अभेद्य बना सकते हैं। दफ्तरों की बात तो अलग है लेकिन घरों में आम तौर पर लोग इस दिशा में कम ही ध्यान देते हैं। नतीजा, आपका वायरलैस नेटवर्क और ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्शन पड़ोसियों और आसपास से गुजरते लोगों की भी पहुंच में हो सकता है। वायरलैस कनेक्शन खुद जितने अदृश्य हैं, उनके सामने आने वाली चुनौतियां भी उतनी ही अदृश्य और अनजान हो सकती हैं। अहमदाबाद बम विस्फोट की ईमेल जिस अमेरिकी नागरिक केन हेवुड के वायरलैस इंटरनेट नेटवर्क से भेजी गई, भला उसने कब कल्पना की होगी कि उसका इंटरनेट कनेक्शन कोई आतंकवादी इस्तेमाल कर लेगा और उन्हें पता भी नहीं चलेगा!

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