
43 साल के इंतजार के बाद लोकसभा ने मंगलवार को अंततः भ्रष्टाचार से निपटने के लिए लोकपाल विधेयक पारित कर दिया, लेकिन सरकार को साथ ही एक बड़ा झटका लगा जब लोकपाल और लोकायुक्त को संवैधानिक दर्जा दिए जाने वाला संविधान संशोधन विधेयक गिर गया क्योंकि विधेयक पारित कराने के लिए आवश्यक दो तिहाई बहुमत सरकार नहीं जुटा पाई। पाठकों का सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर क्या है इस लोकपाल बिल में और यह काम कैसे करेगा...
लोकपाल कमेटी - एक अध्यक्ष सहित अधिकतम आठ सदस्य। इस कमेटी के 50 प्रतिशत सदस्य अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़े वर्ग, महिलाओं व अल्पसंख्यक वर्ग से चुने जाएंगे।
लोकपाल कमेटी की गठन प्रकिया - राष्ट्रपति द्वारा चयन समिति का गठन। यही चयन समिति लोकपाल का गठन करेगी। चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष, लोकसभा में नेता विपक्ष, मुख्य न्यायाधीश या उसके द्वारा नामित उच्चतम न्यायालय का कोई न्यायाधीश व राष्ट्रपति द्वारा नामित विधिवेत्ता इसके सदस्य होंगे।
क्या होगी पद अवधि - लोकपाल की पद अवधि पांच साल या 70 वर्ष आयु (जो भी पहले) होगी।
क्या होगा लोकपाल का वेतन - अध्यक्ष का वेतन-भत्ते व सेवा शर्तें मुख्य न्यायाधीश के समान। सदस्यों के वेतन- भत्ते व सेवा शर्तें सुप्रीम कोर्ट के जज के समान।
वेतन व भत्ते कहां से आएंगे - लोकपाल व सदस्यों का वेतन, भत्ते तथा पेंशन का इंतजाम संचित निधि से किया जाएगा।
लोकपाल सचिव - यह सचिव भारत सरकार के सचिव के स्तर का होगा। नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए नामों के पैनल में से अध्यक्ष द्वारा की जाएगी।
कैसे होगी जांच - लोकसेवक द्वारा किए गए किसी भ्रष्टाचार के अपराध की प्रारंभिक जांच करने के प्रयोजन के लिए एक जांच खंड का गठन करेगा। जांच के लिए अधिकारी व कर्मचारी केंद्र सरकार उपलब्ध कराएगी। अधिकारी अवर सचिव या उससे ऊपर का होगा।
कैसे तय होंगे अभियोजन - लोकपाल लोकसेवकों का अभियोजन करने के लिए एक अभियोजन खंड का गठन कर सकेगा, जिसका अध्यक्ष अभियोजन निदेशक होगा।
कौन होंगे जांच के दायरे में - प्रधानमंत्री, मंत्री, संसद सदस्य, केंद्र सरकार के समूह क, ख, ग और घ वर्ग के अधिकारी। पूर्व व वर्तमान संघ के मंत्री या संसद सदस्यों के लिए भी विशेष प्रावधान।
कौन है जांच दायरे से बाहर - सीबीआई, सेना, अंतरराष्ट्रीय संबंधों, वाह्य और आंतरिक सुरक्षा, लोक व्यवस्था, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष से संबंधित मामलों में प्रधानमंत्री की जांच नहीं की जा सकेगी।
कैसे होगी प्रधानमंत्री की जांच - प्रधानमंत्री की जांच के लिए लोकपाल समिति के तीन चौथाई सदस्यों का अनुमोदन आवश्यक है। जांच बंद कमरे में कराई जाएगी।
कैसी होगी प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया:
1. आरोप से प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने की आशंका व्यक्त करने वालों को पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा।
2. किसी लोक सेवक के भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने की दशा में लोकपाल विशेष न्यायालय में मामला दायर कर सकेगा। इसके नतीजों के साथ रिपोर्ट की एक प्रति सक्षम अधिकारी को भेजेगा। प्रधानमंत्री, मंत्री व संसद सदस्यों के लिए विशेष प्रावधान।
लोकपाल से गलत शिकायत पर दंड:
1. किसी मिथ्या, तुच्छ, द्वेषपूर्ण या परेशान करने वाली शिकायत पाए जाने और दोष सिद्ध हो जाने पर शिकायत करने वाले को 1 वर्ष तक का कारावास और एक लाख रुपए तक का जुर्माना किया जा सकता है।
2. सोसायटी या व्यक्तियों के समूह को भी गलत शिकायत का दोषी पाए जाने पर दंडित किए जाने का प्रावधान।
राज्यों के लिए लोकायुक्त की नियुक्ति:
केंद्र की तरह राज्यपाल द्वारा गठित समिति द्वारा चयन होगा।
लोकपाल के प्रमुख बिंदुः
1. किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद लोकपाल यह तय करेगा कि मामले में आरंभिक जाँच की आवश्यकता है या नहीं।
2. इसके लिए लोकपाल की जाँच विंग 60 दिन में अपनी रिपोर्ट देगी। इसे 60 दिन बढ़ाया जा सकता है।
3. जाँच विंग द्वारा दी गई रिपोर्ट पर लोकपाल की तीन सदस्यों वाली बैंच विचार करेगी। बैंच तय करेगी कि आरंभिक रूप से मामला बनता है या नहीं।
4. जाँच सीबीआई या किसी अन्य जाँच एजेंसी द्वारा छः महीने में पूरी करना होगी। इसे छः माह बढ़ाने का प्रावधान है।
5. लोकपाल बैंच को यह रिपोर्ट सौंपी जाएगी, जो विचार के बाद विशेष कोर्ट में अभियोजन पक्ष को मामला दायर करने या खात्मा रिपोर्ट देने का कहेगी।
6. लोकपाल को उसके द्वारा जाँच किए गए या आदेशित किसी मामले में अभियोजन के लिए किसी तरह की पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होगी।
7. विशेष कोर्ट सुनवाई एक साल में पूरी करेगी। जिसे एक साल बढ़ाया जा सकता है।



